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Chanakya ki Niti : इन 4 गलतियों से टूट जाता है सात फेरों का बंधन, नतीजा तलाक-तलाक-तलाक!

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चाणक्य नीति वैवाहिक जीवन के लिए: आचार्य चाणक्य के नीति शास्त्र में वैवाहिक जीवन के लिए कई बातों का जिक्र है, जो आज भी प्रासंगिक हैं। चाणक्य के अनुसार आज हम आपको वैवाहिक जीवन के बारे में बताने जा रहे हैं।

नयी दिल्ली। चाणक्य नीति वैवाहिक जीवन के लिए आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। ऐसा कहा जाता है कि चाणक्य की नीतियों के कारण साधारण बालक चंद्रगुप्त मौर्य मगध का सम्राट बन गया। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में समाज के लगभग हर विषय से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया है। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में वैवाहिक जीवन के लिए कई बातों का जिक्र किया है, जिनका पालन करके पति-पत्नी अपने रिश्ते को मजबूत बना सकते हैं।

धोखे
आचार्य चाणक्य के अनुसार विवाह में धोखा विष के समान है। सिर्फ पति-पत्नी ही नहीं, किसी भी रिश्ते में धोखा नहीं होना चाहिए। अगर पति-पत्नी अपने रिश्ते को मजबूत बनाना चाहते हैं तो जीवन में कभी भी एक-दूसरे को धोखा न दें।

झूठ
चाणक्य नीति में कहा गया है कि पति-पत्नी के रिश्ते में झूठ के लिए कोई जगह नहीं होती है। एक बार जब किसी रिश्ते में झूठ पकड़ा जाता है तो रिश्ता कमजोर होने लगता है। इसलिए झूठ से दूर रहने में ही भलाई है। पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए।

समानता
अक्सर रिश्तों में लोग खुद को एक दूसरे से ऊपर समझने लगते हैं। चाणक्य नीति के अनुसार विवाह में यह व्यवहार एक बड़ी भूल के समान है। पति-पत्नी को हमेशा एक-दूसरे को समान समझना चाहिए। ऐसा करने से रिश्ते मधुर बने रहते हैं।

गुस्सा
आचार्य चाणक्य के अनुसार क्रोध किसी भी रिश्ते को इतना कमजोर कर सकता है कि उसके बचने की संभावना ही नहीं रहती। वैवाहिक जीवन में पति या पत्नी को हमेशा अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए। क्रोध में लिए गए निर्णय बाद में पछता सकते हैं। इसलिए आपको गुस्सा करने की जगह सोच समझकर व्यवहार करना चाहिए।

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